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डीए पर रोक लगाने के खिलाफ कंप्यूटर अध्यापकों ने दी प्रदर्शन की चेतावनी

जालंधर : डीए पर रोक लगाने के खिलाफ , कंप्यूटर अध्यापकों के जिला प्रधान पवन शर्मा ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी दी ,जिले के जनरल सेक्रेटरी हरजिंदर सिंह और सुशील कुमार वाइस प्रधान ने पंजाब सरकार धारा डीए की किस्तों पर लगाई रोक पर कड़े शब्दों में निंदा की. कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुये अपने खर्चों में कटौती करनी शुरू कर दी है। इस दिशा में सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर एक जुलाई 2021 तक के लिये रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 1 जनवरी 2020 को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। अब इसको लेकर यूनियन में विरोध के स्वर सुनने को मिलने लगे हैं| वही इस मामले में यूनियन के प्रधान ने कहा की सरकार को महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा की इस मामले में हमारी यूनियन की तरफ से केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को मीडिया के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया गया है | प्रधान ने कहा की , अब कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए कर्मचारी और पेंशन वालों की जेब पर डाका मारा है | साथ ही उन्होंने कहा की एक साल के अंदर एक कर्मचारी को काफी घाटा पड़ेगा | जिला प्रधान ने कहा की कोरोना महामारी खत्म होने के बाद इस मामले में हमारी यूनियन केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी | इसी साल मार्च में केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ा कर तनख्वाह का 17 फीसदी करने का ऐलान किया था. ये दर इसी साल 1 जनवरी से लागू हुई थी लेकिन अब इस पर भी रोक लग गई है , जो केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर द्वारा विचार होना चाहिए | साथ ही उन्होंने कहा की डीए बढ़ोतरी पर रोक लगाने के बजाए एनपीएस को खत्म करे तो सरकार को ज्यादा फायदा मिलेगा | यूनियन ने हमेशा एनपीएस का विरोध किया है , साथ ही उन्होंने कहा की कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए एनपीएस खत्म कर दे , जिससे सरकार को बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा | दूसरी तरफ़ यह भी माना जा रहा कीं बड़े अधिकारियों पर कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि इनकम टैक्स के वे टोप ब्रैकट में आते है ।लेकिन निचले स्तर के कर्मचारी पर ज़रूर बोझ पड़ेगा . उप्पर से बढ़नेवाली महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी ।
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